काश! गाँव गाँव में रहता शहर न बसने आता इतिहास अलग होता! काश! गाँव गाँव में रहता शहर न बसने आता इतिहास अलग होता!
अपना अस्तित्व मिटाकर, सम्पूर्णता प्राप्त करती हूँ। अपना अस्तित्व मिटाकर, सम्पूर्णता प्राप्त करती हूँ।
कहीं कलकल बहती जाती हूं मैं नदी हूं मैं सब की प्यास बुझाती हूं। कहीं कलकल बहती जाती हूं मैं नदी हूं मैं सब की प्यास बुझाती हूं।
बीती रात के बाद दिन आता ही है भूल को भूल फिर सवेरा छाता ही है। बीती रात के बाद दिन आता ही है भूल को भूल फिर सवेरा छाता ही है।
वादा करता हूं मेरी जाना तेरा हर पल साथ निभाऊंगा मेरी सारी खुशियां हो तेरी तेरे गमों वादा करता हूं मेरी जाना तेरा हर पल साथ निभाऊंगा मेरी सारी खुशियां हो तेरी ...
पर्वतों की ऊंची ऊंची चोटियां बर्फ का दुशाला पहने खड़ी है। पर्वतों की ऊंची ऊंची चोटियां बर्फ का दुशाला पहने खड़ी है।